डरता हूँ ऐ दिल
पास आने से
की उसके बिना जी नहीं पाऊँगा
रुखी बातें करता हूँ
मीठी शायरी के बदले
सपनो में प्यार करता हूँ
डर-डर के जी नही पाऊँगा !
मेरे अन्दर मेरे दिल में
तेरी हस्ती है
लड़ता हूँ खुद से
तुझे दूर कर
की तेरे बिना जी नहीं पाऊँगा
डर लगता है, तुझसे
तेरी मुस्कान पर
दिल आ गया तो
जी नहीं पाऊंगा
फिर विराम हुआ , संघर्ष का ! और समर्पित कर ही दिया मैने खुद को !
मुझे पास रखोगी , तो पास रहूँगा
दूर रखोगी तो दूर रहूँगा !
हराओगी तो हार जाऊँगा
जीताओगी तो जीत जाऊँगा
दूर करोगी तो दूर चला जाऊँगा
पास

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