हरेक आहट तुम्हारे आने का संकेत देती है। दरवाज़े का खुलना, झींगुर का शोर, आस पड़ोस से आ रहीं आवाजे रात्रि के इस पहर में मेरे मन की शांति को भंग कर देती हैं। कल्पना में व्यवधान होता है अधमुंदी पलके पूरी खुल जाती हैं पर सामने तुम नही होती । होती हैं तो सिर्फ सुनी दीवारें और सफेद छत जिससे लटकता पंखा भी आजकल बेकार हो गया है जाड़े में।
मध्य रात्रि, जब प्रेमी युगल मिलते हैं तब चाँद भी गगन में जवान हो रहा होता है पर उसी काल मेरा मन जर्जर हुआ जाता है तुम्हारे विरह से। ये ठंड सिर्फ तन को ही सिहरन नही देती मन भी सिहरा देती हैं जो तुम्हारी प्रतीक्षा में महीनों से जार बेजार हुआ जा रहा है।
तुम नही आती और न आते हैं तुम्हारे शब्द किसी पत्र में पिरोकर। ऐसा पत्र जिसके पढ़ने से हृदय का संताप दूर हो । तुम्हारे आने की संभावना दिखाई तो दे।

0 टिप्पणियाँ
Leave a lovely comment for the True Love Blog.