हाँ, सोंचने समझने की शक्ति नही है मुझमें। मैं सोंच नही पाता अपना नफा नुकसान। अगर मैं ये सोंच पाता तो आज बहुत आगे निकल गया होता यूं रुका न रहता। 

यूँ लिखता नही तुम्हारे बारे में तुमसे जो भी शिकायतें है जो मैं खुल के नही कह सकता बस लिख दिया करता हूँ। आखिर क्यों तुम मुझे सोचने पे विवश कर रही हो। हज़ार बार मैं ये कह  चुका मुझे सिर्फ तुमसे प्यार करना है फिर क्यों मुझे दुनिया भर के उलझनों में डाल देती हो। ऐ, सुनो मुझसे सिर्फ प्यार की बातें करो न इधर उधर की बातें क्यों करती हो । हर वो बातें जिसमें तुम्हारे चेहरे पर चिंता की लकीरें झलक जाती हैं मुझे नागवार फील होती हैं। कुछ मेरी मजबूरी भी समझो। तुमसे अलग भी मेरी एक दुनिया है। जिसमें परेशानी, चिंता, गुस्सा, प्रतिस्पर्धा , बनावटीपन सब कुछ है फिर एक तुम्हारी दुनिया भी है जहाँ मैं सारी चिंता छोड़ कर आता हूँ। मैं सो जाना चाहता हूँ तेरे प्यार की चादर को ओढ़कर। सभी आवश्यक अनावश्यक कामों को भुलकर । पर तुम.....

और तुम मुझे कुरेदती हो उन सभी बातों की याद दिलाती हो । वो सभी पुरानी बातें जो अच्छे खासे मन को भी मलिन कर दें। जो बातें प्यार भर दे, एक नया जोश , उत्साह वो बातें करो न। जो बातें सिर्फ टीस देती हों उन बातों को दुहराने से क्या लाभ।

प्रिय, सिर्फ प्यार करो न। क्यों परेशान करती हो?

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