आज का दिन इतना बुरा भी नही था। भले ही मैं सुबह से परेशान था। सुबह ही बनारस जाने के लिए ट्रेन पकड़ना था। और ट्रेन छूट गयी। एक दूसरी पैसेंजर ट्रेन जो दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी। जानता था कि चार घंटे पैसेंजर में जा के व्यर्थ जाने वाले थे पर जाना तो था ही। आ कर बैठ गया। ट्रैन बिल्कुल खाली ही थी। सब्र का बांध तो तब टूटा जब टाइम होने के आधे घंटे के बाद भी ट्रेन नही खुली। झल्ला के मैं गेट के पास आ गया । अभी मन ही मन मे कुपित मूड और खराब हो रहा था। तभी मुझे दिखी वो सांवली लड़की। 

वो उस साइड के गेट पर खड़ी थी अपनी 4 सहेलियों के साथ। और मैं दूसरे गेट पर। कुछ खास नही साधारण रंग, सावला, बड़ी बड़ी आंखे , चमकते सफेद दांत, और यौवन से आते आत्मविश्वास से उपजी मादक मुस्कान। खूबसूरत थी वो। पतला काजल लगाए हुए जब वो बात करते करते आंखे मटकाती तो ट्रैन छूटने का अफसोस दिल से जाने लगा।धीरे धीरे ट्रैन भी चलने लगी। अभी वो लोग गेट के पास मेरे सामने वाले केबिन में बैठ गयी।

वो चुपचाप बैठी हुई मुझे ही देख रही थी। चुकी अधिकांश ट्रैन खाली थी इसलिए मैं भी अपने सीट से थोड़ा खिसक कर बैठ गया ताकि उसका चेहरा सामने रहे।फिर क्या?

कई खेत, कई पहाड़ , कई मैदान, तालाब और पशु पक्षी मेरी नजरों के सामने से गुजरे होंगे पर मैंने उन्हें देख के भी नही देखा। वक्त गुजरता गया। आधा घंटा , एक घंटा। बहुत दिनों बाद पैसेंजर ट्रेन से यात्रा कर रहा था। अब लगा यार ये भी सही है मन ही मन मैं इसे बोरिंग मान बैठा था। कभी कभी वो फ़ोन पर बात करने लगती और उसकी छुपी हुई अदाएं उसके चेहरे के भावों में प्रकट होती। ऐसा तो नही कहूँगा की बहुत अधिक पसंद आई वो मुझे। पर हाँ रीझ तो मैं गया था। तब मेरे मन मे सिर्फ यही बात चल रही थी कि मेरी उबाऊ यात्रा को मनोहर बनाने का शुक्रिया। 

एक दो बार नज़रें मिली तो लगा जैसे उसे मेरे होने का भान है। उसे पता है कि कोई उसे देख रहा है। अब वो भी चाहती थी मुझे पढना की आखिर किस हद तक , या किस तरह की नज़रों से मैं उसे देख रहा हूँ । उसने बहुत प्रयास किया होगा मेरी नज़रों को पढ़ने का पर शायद सफल नही रही होगी । मेरे स्टेशन से एक स्टेशन पहले जब वो उतरने लगी तो एक बार फिर उसने एक भेदपूर्ण दृष्टि से मेरी ओर देखा। शायद पूछ रही हो " कहना क्या चाहते हो?" और मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि तुम्हारे उतरने के बाद अगले 10 मीनट तक , जब तक मेरा स्टेशन नही आ जाता मैं तुम्हें याद करता रहूंगा। अच्छा समय गुजरा तुम्हारे साथ। 

संयमित रूप से मैंने यात्रा पूरी की । वो अब भी है पर मेरे जेहन में। और एक बात जो मुझे हमेशा गुदगुदाती रहेगी वो ये है कि क्या वो मुझे याद रखेगी? इस बारे में आपका क्या सोचना है नीचे कमेंट में बता सकते हैं। पर मेरी सुन लीजिए। मुझे लगता है कि हमारी कहानी अधूरी रह गयी और जो कहानियां अधूरी रह जाती हैं अक्सर बहुत याद आती हैं। अक्सर जब हम अकेले होते हैं जब हमारे पास कुछ खास सोचने को नही होता। तब अक्सर ही कुछ चेहरे मस्तिष्क में उभरते हैं और उसी समय शायद ही उस सांवली लड़की का चेहरा उभर आये। और उभर आये मेरे चेहरे पर मुस्कान।