कितना बदलता है इंसान? गिरगिट तो यू ही बदनाम है। तुम जो इतनी बदल गई हो की अब खुद पर विश्वास नही होता की तुम्हें ही पहली नज़र में पसंद किया था मैंने। 

याद आता है मुझे, जब तुम कहा करती थी की मेरे बिना तेरा  चेहरा फीका पड़ जाता है पर आज महीनों बाद तुम्हें देखकर ये भ्रांति दूर हो गई! वही चेहरा जो कुम्हला जाता था मेरी जुदाई से आज चंदन सा चमक रहा है! उसपर तुम्हारा हंस हंस के मुझसे बातें करना ....oops... क्या कहूं ? मैं बेकार ही परेशान था यार की तुम मुझसे बिछड़ कर तड़प रही होगी और कहीं न कहीं ये बात मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी! पर तुम्हें देखकर तो मैं हैरान ही रह गया। कितना गलत था मैं ।

अब मैं खुश हूं यार ! तुम्हारे दमदमाते चेहरे को देखकर। व्यर्थ ही उन लाखों पलों को मैंने गवां दिया सिर्फ ये सोचकर की तुम भी मुझे याद करती होगी। उन पलों की क्या कीमत। सोचा था तुमसे मिलूंगा तो शिकायत करूंगा, उलाहना दूंगा की मैंने तुम्हे इतना याद किया है । और तुमने क्या किया है? बदले में तुम मेरे सीने से लग जाती और प्यार लुटाते हुए कहती , हां मैंने भी तुम्हे याद किया था जान। पर यहां तो मौसम ही बदल चुका है। तुम इतनी खुश क्यों हो यार, मेरे बिना, बात थोड़ी जमी नही। 


चलो एक बात तो है की तुम्हें देखकर ये एहसास हो गया की तुम रह लोगी मेरे बिना भी। रह लोगी और अपना ख्याल भी रख लोगी। खुशी खुशी रह लोगी अपने चमकते चेहरे के साथ! सबक मिला मुझे! कितना गलत था यार तुम्हे समझने में! पुराने लोग ही सही कहते है " लड़कियों को देवता भी न समझ सके तो मनुष्यों की बात ही अलग है" । थोड़ा सदमे में हूं , थोड़ा आराम कर लेता हूं।