जानती हो आज किसी ने पूछा की आपके चेहरे पर इतनी चमक क्यों है?
उसे तो नही बताया पर तुम्हें बता देता हूं।
जानती हो चेहरे पे इतनी चमक क्यों है?
एक मुट्ठी चना
एक टाइम खाना
एक ग्लास दूध
एक प्याली चाय
और एक सिगरेट का धुआं।
बस यही जिंदगी बाकी है।
अब इसी में खट्टा, मीठा या तीता। जीवन का जैसा भी स्वाद हो।
तुम्हारे जैसा खुशनसीब नही हूं मैं।
कुछ एक रंग ही है मेरे जीवन में, जिन्हें मैं संजो के रखना चाहता हूं।
जैसे सूरज तपता है और पीली रोशनी देता है वैसे मैं भी हर पल तपता हूं विरह में। जब थक जाता हूं तब निढाल हो जाता हूं। थोड़े चैन से होने के लिए , आह यूं कहूं की थोड़ा चैन से सोने के लिए। जितना ही चमक बाहर से दिखे मेरे चेहरे पे समझ लेना उतना ही तूफ़ान अंदर से उठ भी रहा होगा।
तब,
जब कभी जब सूरज ढल रहा होता है , लाल आसमान भी खून के आंसू रो रहा होता है। जब पंछी घोसलो में लौट रहे होते हैं। जब ये एहसास खाने लगता है मुझे की मेरा कोई घोंसला नही। कोई अपना नही। कोई नही। तब दो उंगलियों के बीच में एक सिगरेट जलाकर एक कश लेता हूं। लोग कहते हैं क्यों जलाते हो खुद को? शायद उन्हें पता नही की कुछ बचा ही नही है।
तुम्हारे मेरे रिश्ते में, मेरा एक ही तो अभिमान था की जब मैं रूठता था तो तुम मना लेती थी। अब शायद तुम इतना जहमत न उठाओ मुझे मनाने की, क्योंकि बार बार तुम्हें मनाकर मैने आदत जो बिगाड़ दी है । बेगैरत हो चुका हूं मैं। कभी ऐसा हो की तुम रूठी रहो और मेरे प्राण पखेरू उड़ जाएं।
बहुत डूब चुका, जितना जोर लगाता हूं उतना ही नीचे धंसता चला जाता हूं।
दुनिया भर के गम पी लेने के बाद जो पीलिया होता है वही लोगों को मेरे चेहरे पर दिखाई देता हैं उसी के बारे में लोग पूछते हैं। बाकी तो चेहरे पे चमक है ही।


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