उसने मेरी ओर देखा। दिल्लगी में बोली, तुम मुझे प्यार नही करते।

मैंने नजरे झुका ली। 

कहना चाहता था कह नही पाया। 

यही कहना चाहता था की तुम झेल नही पाओगी मेरा प्यार।

कितने दिन?

हां, कितने दिन तक रहेगी साथ? एक साल, दो साल । फिर तो प्यार का खुमार उतर जायेगा। दिखा दोगी अपने सभी रंग मुझे। उसके बाद क्या? फिर वही बेवजह शिकायते, गिले शिकवे, और फिर जुदाई। प्यार का अंजाम जानता हुं मैं।

जानता हुं कितने दिनों के बाद प्यार बोझ बन जाता है। कभी थोडा पहले, कभी कुछ दिनो के बाद। इश्क शराब की तरह होता है। अधिकांश लोग थोडा बच बचा के लेते हैं। कोई लगातार शराब पिए तो फिर शराबी बन जाता है। इश्क में भी उसी लेवल का खतरा है। लगातार इश्क़ करने पर बर्बादी तय हैं। अब मैं तो बर्बाद हूं ही पर तुम्हारी आंखों में बर्बाद होने का हौंसला नही था इसलिए जब तुमने उस समय भले ही दिल्लगी में ही कहा था की प्यार नहीं करते मुझे, मैने नजरे झुका ली थीं। 

सत्य से भाग नहीं सकता मैं। और क्यों भागूं? कितने दिनों तक झूठ की दुनियां में दिल बहलाता रहूं? सच यही है की प्यार में पड़ गया तो फिर वर्षों तक बेकार हो जाऊंगा। और एक सच ये भी है की  जमाने से पहले अगर कोई मुझे ताना देगा तो वो हो तुम! 


आज देखो। कितने दिन गुजर गए तुम्हें देखे हुए पर तुम हो की हजारों गिले शिकवे लिए बैठी हो। कहां गया तुम्हारा प्यार? तुम्हारे बदलते रंगो के साथ हमारे प्यार भरे रिश्ते ने अपनी खुशबू खो दी है। एक और सबक सीख लिया मैने। तुम्हारी सुंदरता से घायल मैं शायद उबरने में वर्षों लग जाएं।