दृश्य 1
सना स्कूटी से जा रही होती है। 
रात का वक्त, 11 बज रहे होंगे 
सुनसान रोड ,
सड़क के किनारे नगर निगम का कचडे का एक लोहे का बड़ा सा साइज का बॉक्स पड़ा है और आस पास कूड़ा कचरा फैला हुआ है। वही पे एक भिखारी टाइप का आदमी जो दूर से थोडा धुंधला दिखाई दे रहा है नजदीक जाने पे अजीब नज़रों से देखता है फिर हंस देता है। उसके इस व्यवहार से और उसके गंदे दाढ़ी बड़े चेहरे और अजीब तरीके से हंसने से वो थोड़ी डर जाती है और फिर खुद को सम्हाल कर उसे कोसते हुए चली जाती है।
Shit ऐसा बोलकर

दृश्य 2- अगले दिन फिर उसी समय
सना वही से गुजरती है स्कूटी से। वो आदमी उसे देखकर मुस्कुराता है। पर वहां बहुत अधिक बदबू फैली हुई है वो अपने दुपट्टे को नाक पर रख के उसे नफरत की नजर से देखती हुई गुजर जाती है।
Shit ऐसा बोलती है नफरत वाली expression ke saath
दृश्य 3
कुछ दिनों के बाद
अभिनव और सना किसी बात पर बहस करते हुए वहीं से गुजरते है, 
अभिनव: यार क्या प्रोजेक्ट बनाएं समझ में nhi aa रहा
सना: वही तो यार
अभिनव : जातिवाद पर प्रोजेक्ट बनाएं क्या?
मूंछों वाला ठाकुर, फटे कपड़े वाला किसान
सना: हंसते हुए ,और ठाकुर का किसान की बीबी के साथ चक्कर, 
नही यार, बोरिंग है, कुछ और, कुछ नया, कुछ अलग

अभिनव सना का स्कूटी लेकर पैदल ही सना के साथ धीरे धीरे वहां से गुजर रहा होता है। तभी उन्हें कचरे के बॉक्स के पीछे से कुछ आहट आती है। वही भिकारी वहां से दो बोरे को सड़क पर खीच के उस पार ले जा रहा होता है। बीच सड़क पर आकर वो इन दोनों को देखकर ठिठक जाता है फिर वो जल्दी जल्दी बोरे को खींचने लगता है। वातावरण में दुर्गंध फैल जाती है।

फिर ये दोनो आपस में विचार विमर्श कर उसके पीछे जाने का प्रयास करते हैं। पेड़ो के झुरमुट से होता हुआ वो आदमी आगे बढ़ता है। इनकी उत्सुकता बढ़ती जाती है। सना और अभिनव दबे पांव उसका पीछा करते हैं। पेड़ों के बीच में एक जगह जाकर वह रुक जाता है फिर चोरी की नजरों से चारो तरफ देखता है। फिर वह वहीं पड़ी टूटी एक लकड़ी उठाता है और गड्ढा करना शुरू कर देता है।  
बीच बीच में बेसुरे ढंग से वो गाता है " चोला माटी के राम"
एक ज्यादा बड़ा nhi चौकोर सा गड्ढा कर के वो बोरा खोलकर उसमें से मरा हुआ कुत्ता निकलता है और गड्ढे में गाड़ देता है। उसके बाद कहीं से एक पौधा उखाड़ कर लाता है और उस कब्र पे लगा देता है। उसके बाद उसी कब्र पर ॐ बना देता है उंगली से खेल खेल में ही। फिर गाता है, " चोला माटी के राम" ।

उन दोनो की नज़रे इधर उधर जाती हैं तो देखती हैं की वहां और कई उसी प्रकार के पौधे लगाए गए हैं।
दोनों सड़क पर वापस आ जाते हैं
सना: मुझे तो प्रोजेक्ट मिल गया।
अभिनव उंगली से पेड़ों के झुरमुट की तरफ इशारा करता है
और वो हां में खुशी में सर हिलाती है।
Drishya 5
सना अभिनव का सर अपने गोद में लेकर सहला रही है, किसी छत जैसी जगह पर जहां एक बेंच है। चाय वगैरह के कप रखे हो सकते हैं।
अचानक चौंक कर, पता हैं मैंने अपने प्रोजेक्ट का नाम सोच लिया है। 
अभिनव उठता है, अच्छा, 
सना: मानव गिद्ध
अभिनव: कुछ आश्चर्य से , मानव गिद्ध 
सना: चहकते हुए, देखो, आसमान के तरफ इशारा करके बाहें फ़ैला के , पूरे स्टाइल में
गिद्ध मरे हुए को खा कर, उसकी बदबू और गंदगी को खत्म करता है। और बाबा जिसे हमने कल देखा,
चहकते हुए
वो, गज़ब है कमाल हो गया, 
मानव गिद्ध, 
मैं कितनी गलत थी यार उसके बारे में , थोडा उदास होकर
एक बार बाबा से मिले क्या
Scene ख़त्म
अगले दिन बाबा की खोज में दोनो भटकते हैं घाट किनारे, 
कोई उन्हें पागल, कोई उन्हें न जाने क्यों आजकल क्या सूझी थी की कचरे के किनारे बैठे रहते दिन भर ,
 थक के किनारे बैठ जाती है,,
सामने बह रही नदी धुंधली हो जाती है
नेपथ्य background से आवाज आती है।
जैसे बाबा नहा धोकर अपने साफ सुथरे रूप में कह रहे हों "तू बन जा मानव गिद्ध" ।