शरीफों सी नजाकत है
अमीरों सी नफासत है
दिखाई दे तो खुशबू है
जरा सा डूब कर देखू
बड़ी सी झील आंखों में
किसी कोने में सिमटी सी
शरारत है, शरारत है
गज़ब का हुस्न है उसका
कोई नायाब ही होगा
जिसे रचकर विधाता ने
कहा होगा
कयामत है कयामत है।
कोई होगा कहीं होगा
जो अपना नाम लिखेगा
तुम्हारे कोरे कागज पे
नसीबों का धनी होगा
जो तू बार ये कह दे
इजाजत है इजाजत है
अमिताभ मिश्रा

0 टिप्पणियाँ
Leave a lovely comment for the True Love Blog.